एक विरान सी जगह थी,
जहाँ सिर्फ़ अँधेरा था !!
उस अँधेरा में एक खंडहर था,
जिस खंडहर पर एक दिया थी !!
उस दिये में सिर्फ़ बाती थी (तेल नही था ),
उस बाती में एक मधिम ज्वाला थी !!
पर उसकि मधिमता में भी बरी जलन थी ,
इस बात का मुझे एहसास था !!
क्यूंकि वो विरानगी मेरी अपनी थी,
वो अँधेरा मेरा अपना था,
वो खंडहर मेरा घर था,
वो दिया मेरी जिन्दगी थी ,
और वो बाती मै खुद था !!
Tuesday, November 10, 2009
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